तकनीक ने शब्दों को रचने और संवाद को आसान बनाने की हमारी क्षमता को अभूतपूर्व गति दी है, लेकिन क्या शब्दों का निर्माण ही साहित्य है? *काव्यधरा* के प्रथम अंक से प्रेरित यह लेख इसी सवाल के बहाने तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साहित्य और मानवीय संवेदना के रिश्ते को समझने की कोशिश करता है। मशीन भाषा को व्यवस्थित कर सकती है, पर स्मृतियों की गर्माहट, पीड़ा की गहराई और मानवीय अनुभूति को जी नहीं सकती। ऐसे समय में साहित्य केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर मनुष्य को बचाए रखने का मा